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हमारे जीवन में चिंता एक अनचाहा साथी बन चुकी है। कभी करियर की चिंता, कभी रिश्तों की, कभी भविष्य की… मन लगातार भागता रहता है और शांति कहीं खो सी जाती है। आज से हजारों वर्ष पूर्व, महाभारत के युद्धभूमि पर अर्जुन भी इसी बेचैनी से जूझ रहे थे - निराशा, भय और असमंजस।
तब भगवान श्रीकृष्ण ने जो उपदेश दिया, वही भगवद्गीता कहलाया - और वही आज भी हमारे लिए Anxiety का सबसे शक्तिशाली समाधान है।
इस लेख में हम पांच ऐसे श्लोक जानेंगे, जो चिंता के क्षणों में मन को शांति और स्थिरता प्रदान करते हैं।
Verse - (Gita 2.47):
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
Meaning:
तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है। फल क्या होगा - यह कभी तुम्हारी चिंता नहीं होनी चाहिए। और न ही फल की इच्छा से कर्म छोड़ना चाहिए।
How this helps anxiety:
हमारी अधिकांश चिंता परिणाम से जुड़ी होती है -
“अगर फेल हो गया तो?”
“अगर नौकरी नहीं मिली तो?”
“अगर लोग क्या कहेंगे?”
श्रीकृष्ण याद दिलाते हैं:
परिणाम ईश्वर पर छोड़ दो।
हमारा काम है - आज, इस क्षण में अपना सर्वश्रेष्ठ देना। फल जैसा भी मिलेगा, वही उचित होगा।
Verse - (Gita 6.5):
उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥
Meaning:
मनुष्य को स्वयं अपने मन से उठना चाहिए, गिराना नहीं। मन ही हमारा सबसे बड़ा मित्र है और मन ही सबसे बड़ा शत्रु।
How this helps anxiety:
Often, our anxiety is not from the outside world -
it is our thoughts attacking us.
This verse empowers you to take charge of your inner dialogue:
➤ Self-compassion instead of self-blame
➤ Inner encouragement instead of harsh criticism
जब मन को साध लेते हैं, चिंता स्वतः शांत हो जाती है।
Verse - (Gita 18.66):
सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥
Meaning:
सभी चिंताओं, सभी भ्रमों को त्यागकर मेरे शरण में आओ। मैं तुम्हें हर पाप और दुख से मुक्त कर दूँगा। चिंता मत करो।
How this helps anxiety:
यह श्लोक हमें कट्रोल छोड़कर विश्वास अपनाने का संदेश देता है।
When nothing seems in your control, surrender to the divine plan.
👉 यह स्वीकारना कि ब्रह्मांड हमेशा तुम्हारे पक्ष में काम कर रहा है -
यह विश्वास चिंता को dissolve कर देता है।
Verse - (Gita 6.34–35):
चंचलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद् दृढम्…
…अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते॥
Meaning:
अर्जुन कहते हैं - “मन चंचल है, वायु की भाँति।”
भगवान कहते हैं - “अभ्यास और वैराग्य से यह नियंत्रित होता है।”
How this helps anxiety:
Meditation, Pranayama, Discipline… ये सब मन को धीरे-धीरे शांत करते हैं।
Anxiety एक रात में ठीक नहीं होती - Daily inner practice ज़रूरी है।
Small Practices that help:
Deep breathing 5 minutes daily
Mindful walking
Screen-free mornings
Simple mantra meditation - “ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः”
Verse - (Gita 2.23):
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥
Meaning:
आत्मा को न कोई शस्त्र काट सकता है, न अग्नि जला सकती है, न जल गीला कर सकता है, न वायु सुखा सकती है।
How this helps anxiety:
हमारा भय अक्सर खोने के डर से उत्पन्न होता है - शरीर, पैसा, संबंध, पहचान।
But Gita reminds us: You are the Immortal Self.
जब पहचान शरीर से हटकर आत्मा में स्थिर होती है,
चिंता की पकड़ स्वतः ढीली हो जाती है।
| Practice | Time Needed | Benefit |
|---|---|---|
| 1 Gita verse reading & reflection | 5 minutes/day | Mind gets a positive anchor |
| Deep breathing (4-4-6 technique) | 5 minutes | Calms nervous system |
| “कर्मयोग” mindset in work | Throughout day | Less fear of outcomes |
| Surrender meditation at night | 3 minutes | Reduces overthinking |
Just 15–20 minutes daily can transform your inner state.
अर्जुन की निराशा ने ही गीता को जन्म दिया।
इसीलिए जब आपका मन भी उसी तरह भयभीत, भ्रमित और बेचैन हो -
गीता आपका सहारा बनती है।
Krishna does not say “Don’t worry” loosely.
He shows how to rise above fear, confusion, and anxiety by:
Right action
Mind mastery
Faith and surrender
Daily discipline
Realizing the true Self
Anxiety comes and goes -
But the wisdom of Gita anchors your peace forever.
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