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राजाधीराज द्वारीकाधीशजी के संध्या आरती दर्शन 🙏🏻| 12/05/2026

राजाधीराज द्वारीकाधीशजी के पुष्पशृंगार एवं सुकामेवा मनोरथ दर्शन | 12.05.2026

राजाधिराज द्वारकाधीश जी के मङ्गला आरती दर्शन | 12.05.2026

श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग मंगला आरती श्रृंगार | 12.05.2026

श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंगला शृंगार आरती | 12.05.2026

श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन | 12.05.2026

आज के श्रृंगार दर्शन श्री राधावल्लभ लाल जी | 12.05.2026

आज के श्रृंगार दर्शन श्री लाड़ली जी बरसाना धाम | 12.05.2026

आज के श्रृंगार दर्शन श्री बांके बिहारी जी वृन्दावन धाम | 12.05.2026

आज के मंगला दर्शन श्री राधाबल्लभ जी वृन्दावन धाम | 12.05.2026

मंगला आरती दर्शन श्री राधारमण लाल जी वृन्दावन धाम | 12.05.2026

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग प्रातः कालीन दद्योदक आरती | 12-05-2026

आज के श्रृंगार दर्शन श्री लाड़ली जी बरसाना धाम | 11.05.2026

आज के श्रृंगार दर्शन श्री राधावल्लभ लाल जी | 11.05.2026

आज के श्रृंगार दर्शन श्री नन्दमहल नंदगांव | 11.05.2026

आज के श्रृंगार दर्शन श्री बांके बिहारी जी वृन्दावन धाम | 11.05.2026

आज के दर्शन श्री गिर्राज जी दानघाटी गोवर्धन | 11.05.2026

श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन | 11.05.2026

राजाधिराज द्वारकाधीश जी के मङ्गला आरती दर्शन | 11/05/2026

राजाधिराज द्वारकाधीश जी के मङ्गला आरती दर्शन | 10.05.2026

मो सम दीन न दीन हित, तुम्ह समान रघुबीर। Mo Sam Deen Na Deen Hit : Tulsidas Ji Ki Ram Bhakti Vaani | Bhakti Geet, Dohe aur Pad

मो सम दीन न दीन हित, तुम्ह समान रघुबीर।  
अस बिचारि रघुबंस मनि, हरहु बिषम भव भीर॥


कामिहि नारि पिआरि जिमि, लोभिहि प्रिय जिमि दाम।  
तिमि रघुनाथ निरंतर, प्रिय लागहु मोहि राम।


राम भरोसो राम बल, राम नाम बिस्वास।  
सुमिरत सुभ मंगल कुसल, मांगत तुलसीदास॥


सीता लखन समेत प्रभु, सोहत तुलसीदास।  
हरषत सुर बरषत सुमन, सगुन सुमंगल बास॥


राम बाम दिसि जानकी, लखन दाहिनी ओर।  
ध्यान सकल कल्यानमय, सुरतरु तुलसी तोर॥


पंचबटी बट बिटप तर, सीता लखन समेत।  
सोहत तुलसीदास प्रभु, सकल सुमंगल देत॥


कहा कहों छवि आपकी , भले विराजे नाथ ।
तुलसी मस्तक तब नबै, धनुष बाण लो हाथ ।।


कहा कहों छवि आपकी , भले विराजे नाथ ।
तुलसी मस्तक तब नबै, धनुष बाण लो हाथ ।।


एकु छत्रु एकु मुकुटमनि, सब बरननि पर जोउ।  
तुलसी रघुबर नाम के, बरन बिराजत दोउ॥


कोटि कल्प काशी बसे, मथुरा कल्प हजार।  
एक निमिष सरयू बसे, तुलै न तुलसीदास॥


राम न मारे काहुकों, ऐसे मोरे राम ।
अपने आप मर जाएंगे, कर कर खोटे काम ।।


एक घड़ी आधी घड़ी , आधी में पुनि आध ।
तुलसी संगत साधु की , हरहुं कोटि अपराध ।।


राम झरोखा बैठ कै , सबका मुजरा लेत ।
जैसी जाकी चाकरी , प्रभु वैसा ही फल देत।।


अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काज।  
दास मलूका कह गए, सबके दाता राम॥

 

 

 

सियावर रामचंद्र की जय, पवनसुत हनुमान की जय।

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