HI : For The Hindu, By The Hindu
राजाधीराज द्वारीकाधीशजी के संध्या आरती दर्शन 🙏🏻| 12/05/2026
राजाधीराज द्वारीकाधीशजी के पुष्पशृंगार एवं सुकामेवा मनोरथ दर्शन | 12.05.2026
राजाधिराज द्वारकाधीश जी के मङ्गला आरती दर्शन | 12.05.2026
श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग मंगला आरती श्रृंगार | 12.05.2026
श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंगला शृंगार आरती | 12.05.2026
श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन | 12.05.2026
आज के श्रृंगार दर्शन श्री राधावल्लभ लाल जी | 12.05.2026
आज के श्रृंगार दर्शन श्री लाड़ली जी बरसाना धाम | 12.05.2026
आज के श्रृंगार दर्शन श्री बांके बिहारी जी वृन्दावन धाम | 12.05.2026
आज के मंगला दर्शन श्री राधाबल्लभ जी वृन्दावन धाम | 12.05.2026
मंगला आरती दर्शन श्री राधारमण लाल जी वृन्दावन धाम | 12.05.2026
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग प्रातः कालीन दद्योदक आरती | 12-05-2026
आज के श्रृंगार दर्शन श्री लाड़ली जी बरसाना धाम | 11.05.2026
आज के श्रृंगार दर्शन श्री राधावल्लभ लाल जी | 11.05.2026
आज के श्रृंगार दर्शन श्री नन्दमहल नंदगांव | 11.05.2026
आज के श्रृंगार दर्शन श्री बांके बिहारी जी वृन्दावन धाम | 11.05.2026
आज के दर्शन श्री गिर्राज जी दानघाटी गोवर्धन | 11.05.2026
श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन | 11.05.2026
राजाधिराज द्वारकाधीश जी के मङ्गला आरती दर्शन | 11/05/2026
राजाधिराज द्वारकाधीश जी के मङ्गला आरती दर्शन | 10.05.2026
जय जय कैला मात, हे तुम्हे नमाउ माथ ॥
शरण पडूं में चरण, में जोडूं दोनों हाथ ॥
आप जानी जान हो, मैं माता अंजान ॥
क्षमा भूल मेरी करो, करूँ तेरा गुणगान ॥
जय जय जय कैला महारानी ।
नमो नमो जगदम्ब भवानी ॥
सब जग की हो भाग्य विधाता ।
आदि शक्ति तू सबकी माता ॥
दोनों बहिना सबसे न्यारी ।
महिमा अपरम्पार तुम्हारी ॥
शोभा सदन सकल गुणखानी ।
वैद पुराणन माँही बखानी ॥
जय हो मात करौली वाली ।
शत प्रणाम कालीसिल वाली ॥
ज्वालाजी में ज्योति तुम्हारी ।
हिंगलाज में तू महतारी ॥
तू ही नई सैमरी वाली ।
तू चामुंडा तू कंकाली ॥
नगर कोट में तू ही विराजे ।
विंध्यांचल में तू ही राजै ॥
धौलागढ़ बेलौन तू माता ।
वैष्णवदेवी जग विख्याता ॥
नव दुर्गा तू मात भवानी ।
चामुंडा मंशा कल्याणी ॥
जय जय सूये चोले वाली ।
जय काली कलकत्ते वाली ॥
तू ही लक्ष्मी तू ही ब्रम्हाणी ।
पार्वती तू ही इन्द्राणी ॥
सरस्वती तू विद्या दाता ।
तू ही है संतोषी माता ॥
अन्नपुर्णा तू जग पालक ।
मात पिता तू ही हम बालक ॥
तू राधा तू सावित्री ।
तारा मतंग्डिंग गायत्री ॥
तू ही आदि सुंदरी अम्बा ।
मात चर्चिका हे जगदम्बा ॥
एक हाथ में खप्पर राजै ।
दूजे हाथ त्रिशूल विराजै ॥
कालीसिल पै दानव मारे ।
राजा नल के कारज सारे ॥
शुम्भ निशुम्भ नसावनि हारी ।
महिषासुर को मारनवारी ॥
रक्तबीज रण बीच पछारो ।
शंखासुर तैने संहारो ॥
ऊँचे नीचे पर्वत वारी ।
करती माता सिंह सवारी ॥
ध्वजा तेरी ऊपर फहरावे ।
तीन लोक में यश फैलावे ॥
अष्ट प्रहर माँ नौबत बाजै ।
चाँदी के चौतरा विराजै ॥
लांगुर घटूअन चलै भवन में ।
मात राज तेरौ त्रिभुवन में ॥
घनन घनन घन घंटा बाजत ।
ब्रह्मा विष्णु देव सब ध्यावत ॥
अगनित दीप जले मंदिर में ।
ज्योति जले तेरी घर-घर में ॥
चौसठ जोगिन आंगन नाचत ।
बामन भैरों अस्तुति गावत ॥
देव दनुज गन्धर्व व किन्नर ।
भूत पिशाच नाग नारी नर ॥
सब मिल माता तोय मनावे ।
रात दिन तेरे गुण गावे ॥
जो तेरा बोले जयकारा ।
होय मात उसका निस्तारा ॥
मना मनौती आकर घर सै ।
जात लगा जो तोंकू परसै ॥
ध्वजा नारियल भेंट चढ़ावे ।
गुंगर लौंग सो ज्योति जलावै ॥
हलुआ पूरी भोग लगावै ।
रोली मेहंदी फूल चढ़ावे ॥
जो लांगुरिया गोद खिलावै ।
धन बल विद्या बुद्धि पावै ॥
जो माँ को जागरण करावै ।
चाँदी को सिर छत्र धरावै ॥
जीवन भर सारे सुख पावै ।
यश गौरव दुनिया में छावै ॥
जो भभूत मस्तक पै लगावे ।
भूत-प्रेत न वाय सतावै ॥
जो कैला चालीसा पढ़ता।
नित्य नियम से इसे सुमरता ॥
मन वांछित वह फल को पाता ।
दुःख दारिद्र नष्ट हो जाता ॥
गोविन्द शिशु है शरण तुम्हारी ।
रक्षा कर कैला महतारी ॥
संवत तत्व गुण नभ भुज सुन्दर रविवार ।
पौष सुदी दौज शुभ पूर्ण भयो यह कार ॥